Monday, November 2, 2026
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योगी को वोटरों के नाम कटने की चिंता या राजनीतिक पैंतरा

योगी को वोटरों के नाम कटने की चिंता या राजनीतिक पैंतरा

विपक्षी दल तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एसआईआर में धांधली के आरोप लगा ही रहे हैं, अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उत्तर प्रदेश को लेकर यही आरोप ज्ञानेश कुमार पर लगा दिया है। योगी के आरोप सच्चाई तो है ही लेकिन यह भाजपा में चल रहे सत्ता संघर्ष में योगी का एक पैंतरा भी है।

द न्यूज लॉन्चर डेस्क

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस बात की चिंता है कि राज्य में करीब एक लाख 30 हजार हिंदुओं के वोट कट गए। कायदे से तो संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को, जिसने संविधान की शपथ ली है, उसे जाति, धर्म, लिंग या नस्ल आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री को जितने भी वोट कटे हैं, उन सबकी चिंता करनी चाहिए। लेकिन जब योगी आदित्यनाथ 80 और 20 का चुनाव बताते हैं और मुस्लिमों को अलग थलग करने का खुलेआम ऐलान करते हैं तो उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वे मुस्लिम वोट कटने से चिंतित होंगे।

बहरहाल, मुख्यमंत्री की एक लाख 30 हिंदुओं के वोट कटने की चिंता से यह भी पता चलता है कि किस तरह से चुनाव आयोग ने मनमाने तरीके से काम किया है। इसमें भी योगी आदित्यनाथ की चिंता इस बात को लेकर ज्यादा है कि 55 लाख ऐसे लोगों के नाम कटे हैं, जो सरकारी योजनाओं के लाभार्थी हैं। जाहिर है कि वे इनकी बात कर रहे हैं लेकिन ज्यादा चिंता उन 75 लाख लोगों के नाम को लेकर होगी, जो लाभार्थी नहीं हैं। जो लाभार्थी नहीं है वह मध्य वर्ग का होगा और संभव है कि भाजपा का कोर वोटर हो। वैसे भी पहले से कहा जा रहा था कि लखनऊ से लेकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम कटे हैं, जो भाजपा के समर्थक मतदाता हो सकते हैं।

यह भी हो सकता है कि योगी आदित्यनाथ को यह अंदाजा हो गया हो कि अगले चुनाव में उनकी वापसी मुश्किल हो सकती है, इसलिए उन्होंने उसकी भूमिका अभी से बनाना शुरू कर दी हो, ताकि चुनाव नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं आने पर वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहरा सके। ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहराने का मतलब होगा अमित शाह को जिम्मेदार ठहराना, क्योंकि माना जाता है कि ज्ञानेश कुमार वही करते हैं, जैसा उन्हें अमित शाह की ओर से कहा जाता है। यह तथ्य किसी से छुपा नही है कि योगी और शाह की तनातनी पुरानी है।

गौरतलब है कि भाजपा का कोर वोटर प्रधानमंत्री मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में अमित शाह की तुलना में योगी को ज्यादा पसंद करता है। चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों की ओर से मोदी के बाद योगी की मांग ही सबसे ज्यादा होती हैं योगी दो बार से लगातार मुख्यमंत्री हैं और अगर तीसरी बार भी मुख्यमंत्री बनते हैं तो ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी ज्यादा पुख्ता हो सकती है और अमित शाह कतई नहीं चाहेंगे कि ऐसा हो।

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