एक नंवबर को विपक्ष की रैली होगी, भाजपा की तमाम कोशिशें नाकाम
रैली टलवाने की भाजपा की तमाम कोशिशों के बीच कांग्रेस ने तो इस रैली से पहले दूसरे कार्यक्रमों का भी ऐलान कर दिया है। असल में कांग्रेस ने तय किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और एसआईआर की गड़बड़ियो के खिलाफ आंदोलन के बीच बहुत ज्यादा अंतराल नही रखना है। इसे लोगों की स्मृति बनाए रखना है।
द न्यूज लॉन्चर डेस्क
दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली विपक्षी दलों की रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी बेहद परेशान है। उसकी ओर से तरह-तरह से कोशिश की जा रही है कि किसी तरह रैली का आयोजन टल जाए। लेकिन लगता नहीं है कि कांग्रेस या इंडिया ब्लॉक में शामिल अन्य विपक्षी दल रैली को टालने का फैसला करेंगे।
इस रैली की योजना भले ही कांग्रेस ने बनाई और कांग्रेस ही सबसे ज्यादा तैयारी कर रही है, लेकिन यह रैली 'इंडिया’ ब्लॉक की है। रैली का फैसला भी सभी पार्टियो की सहमति से किया गया है। इसके बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को समन्वय का जिम्मा दिया गया। रैली को सफल बनाने मे सबसे बड़ी भूमिका उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की मानी जा रही है। उसकी ओर से रैली की तैयारी की जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा की टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेता अपने साथ भीड़ लेकर पहुंचेंगे।
उधर बिहार में राष्ट्रीय जनता दल ने भी अपने कार्यकर्ताओं से दिल्ली पहुंचने को कहा है। पार्टी की ओर से दो पन्नों की एक चिट्ठी जारी की गई है, जिसमें चुनाव आयोग की गड़बड़ियां बताई गई हैं और लोगों से रामलीला मैदान की रैली में शामिल होने को कहा गया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस भी इस रैली का हिस्सा है। लेकिन पश्चिम बंगाल से ज्यादा लोगों को लाना संभव नहीं है। वामपंथी पार्टियों के छात्र संगठन भी रैली को सफल बनाने के लिए तैयारी कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी जरूर रैली से दूर रहेगी।
रैली टलवाने की भाजपा की तमाम कोशिशों के बीच कांग्रेस ने तो इस रैली से पहले दूसरे कार्यक्रमों का भी ऐलान कर दिया है। असल में कांग्रेस ने तय किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और एसआईआर की गड़बड़ियो के खिलाफ आंदोलन के बीच बहुत ज्यादा अंतराल नही रखना है। इसे लोगों की स्मृति बनाए रखना है।
दूसरा कारण यह है कि अगर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां स्पेस देगी तो दूसरे संगठन उस स्पेस हथिया लेंगे, जैसे पिछले दिनों 'पीपल अगेस्ट एसआईआर’ का गठन हुआ और उन लोगो ने दिल्ली में प्रदर्शन भी किया। इसीलिए कांग्रेस ने एक नवंबर की रैली से पहले 3० अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'पब्लिक इम्पीचमेंट’ यानी 'जन महाभियोग’ की भी घोषणा कर दी है। इस तरह दो दिन पहले ही कांग्रेस रामलीला मैदान की रैली का माहौल बनाएगी।
दूसरी ओर भाजपा की तरफ से किसी तरह इस रैली को रूकवाने के उपाय किए जा रहे हैं। दिल्ली के व्यापारी संगठनों की ओर से राहुल गांधी को चिट्ठी लिखने का फैसला स्पष्ट रूप से राजनीतिक है। दिल्ली के और खास कर पुरानी दिल्ली के व्यापारी रामलीला मैदान की रैलियों के बारे में जानते हैं। उन्हें पता है कि अगर पुलिस बेवजह चारों तरफ बैरिकेडिंग नहीं करे तो कितनी भी बड़ी रैली हो, उससे दो चार घंटे से ज्यादा की डिस्टबंस नहीं होती है।
इसके अलावा कई व्यापारियों का मानना है कि अगर दिल्ली के आसपास के राज्यों से हजारों की संख्या में लोग रामलीला मैदान की रैली में पहुंचेंगे तो वे आसपास के बाजारों में दिवाली की खरीद करके जाएंगे। सो, उन्हें लग रहा है कि रैली की वजह से कुछ अतिरिक्त कारोबार हो सकता है। लेकिन भाजपा और उसका मीडिया व सोशल मीडिया में सक्रिय उसका इकोसिस्टम ऐसा माहौल बना रहा है, जैसे रैली से हजारों करोड़ का नुकसान होगा।
कारोबारियों की चिट्ठी के अलावा भाजपा का दूसरा उपाय एक नवंबर को सिख विरोधी दंगों से जोड़ने का भी है। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि राहुल गांधी एक नवंबर को रामलीला मैदान मे इसलिए रैली कर रहे हैं, क्योंकि वे सिख विरोधी दंगो की याद दिला कर सिखों के जख्मों हरा करना चाहते हैं। यह प्रचार पहले सोशल मीडिया के जरिए किया गया और अब खुल कर भाजपा के नेता यह कह रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि कुछ नहीं होगा तो पंजाब के चुनाव में कुछ वोटो का तो फायदा हो ही सकता है।
इस बीच भाजपा का इकोसिस्टम इस बात को भी प्रचारित कर रहा है कि सोनिया गांधी दिवाली से पहले रैली के आयोजन के पक्ष में नहीं थीं, लेकिन राहुल गांधी ने उनकी बात भी नहीं मानी। मीडिया और सोशल मीडिया के में कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी समझदारी की राजनीति कर रही थी, जबकि राहुल मनमानी और गैर जिम्मेदाराना राजनीति कर रहे हैं।
बहरहाल, कांग्रेस की ओर से बताया जा रहा है कि राहुल की चाय पार्टी में तय हुआ था कि दशहरा, दिवाली में लोगों सुविधाओ का ध्यान रखते हुए प्रदर्शन स्थगित कर दिया जाए। लेकिन उसके बाद भी कई संगठनों के प्रदर्शन चलते रहे। कॉकरोच जनता पार्टी चुप नहीं बैठी और कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी प्रदर्शन किया।
इस बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर नई गड़बड़ियों की खबरें आती रहीं। कर्नाटक, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई गड़बड़ियां पकड़ी गईं। इसलिए कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने तय किया कि अगर एक महीने का अंतराल दे दिया गया तो यह मामला पीछे चला जाएगा। सरकार वैसे भी न्यूज साइकिल बदलने के लिए कई तरह के उपाय कर रही है। इसलिए एक नवंबर को रामलीला मैदान में रैली का फैसला किया गया।
बहरहाल, चाहे व्यापारियों की चिट्ठी हो या सिख विरोधी दंगों से जोड़ने की कोशिश या फिर सोनिया गांधी की कथित असहमति वाला प्रचार, राहुल गांधी रैली नहीं टालने वाले हैं। रैली की तैयारियां बहुत बड़े पैमाने पर चल रही हैं।
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