राहुल के बरी होने से सपा और भाजपा को भी राहत
अगर राहुल गांधी दोषी को सजा हो जाती तो फिर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ज्यादा आक्रामक हो जाती। राहुल गांधी ज्यादा सक्रिय हो जाते और कांग्रेस भाजपा विरोधी वोट को एकजुट करने लगती। मुस्लिम वोटों पर उसकी दावेदारी बढ़ जाती और फिर दलित वोट भी कांग्रेस की ओर रुझान दिखा सकता था।
द न्यूज लॉन्चर डेस्क
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अमित शाह की मानहानि के मामले में राहुल गांधी को बाइज्जत बरी करते हुए मुकदमा खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से कांग्रेस को जितनी खुशी हुई है, उससे कहीं ज्यादा समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को राहत महसूस हुई है।
अगर इस मामले में राहुल गांधी दोषी ठहरा दिए जाते और उन्हें सजा हो जाती तो फिर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ज्यादा आक्रामक हो जाती। राहुल गांधी ज्यादा सक्रिय हो जाते और कांग्रेस भाजपा विरोधी वोट को एकजुट करने लगती। मुस्लिम वोटों पर उसकी दावेदारी बढ़ जाती और फिर दलित वोट भी कांग्रेस की ओर रुझान दिखा सकता था।
समाजवादी पार्टी को यह चिंता सता भी रही थी कि अगर राहुल को सजा होती है तो पहले से ही 180 सीटों पर लड़ने का दावा कर रही कांग्रेस ज्यादा मोलभाव करने लगेगी। भाजपा को भी कांग्रेस की सक्रियता से ब्राह्मण और दलित वोट टूटने की चिंता है। इसीलिए राहुल को बरी किया गया तो सबने राहत की सांस ली।
दरअसल राहुल के खिलाफ मानहानि का यह मामला आठ साल पुराना है। 2०18 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने अमित शाह पर टिप्पणी की थी। उस समय अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। राहुल गांधी ने कहा था कि भाजपा ने ऐसे नेता को अध्यक्ष बनाया है, जिसके ऊपर हत्या का आरोप है। उन्होंने कई बार इस बात को दोहराया था।
राहुल ने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि अमित शाह हत्या के आरोपी है। वे जस्टिस लोया की मौत के मामले का जिक्र कर रहे थे। गौरतलब है कि उस मामले मे अमित शाह अदालत से बरी हो चुके हैं। लेकिन राहुल गांधी की इस टिप्पणी को लेकर भाजपा के एक कार्यकर्ता ने सुल्तानपुर मे मानहानि का केस कर दिया। उसका कहना था कि इससे भाजपा का अपमान हुआ है।
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