यह क्या हो गया है सुप्रीम कोर्ट को?
याचिकाकर्ता यह शिकायत लेकर सुप्रीम कोर्ट गया कि त्योहार के इस सीज़न में विमान कंपनियों ने किराया सात गुना तक बढ़ा दिया है। गुजारिश की कि न्यायालय तुरंत फौरन सुनवाई करे। लेकिन न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अगुआई वाली खंडपीठ ने यह कहते हुए याचिका ठुकरा दी कि “हवाई यात्रा मत कीजिए”। तो यही समाधान है। जो सेवाएं पहुंच से बाहर हो जाएं, उनका इस्तेमाल ना करें!
संपादकीय
कुछ महीने पहले पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले चुनाव आयोग जिन लोगों के नाम अनुचित मनमाने तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए थे, उन लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई बात नहीं, इस चुनाव में न सही, अगले चुनाव में वोट डाल देना। अब सुप्रीम कोर्ट ने लोगों से कहा है कि विमानन कंपनियों ने किराया अनापशनाप बढा दिया है तो हवाई यात्रा मत करो। सवाल है कि क्या यही समाधान है कि जो चीजें या अधिकार पहुंच से बाहर हो जाए, उनको भूल जाओ।
याचिकाकर्ता यह शिकायत लेकर सुप्रीम कोर्ट गया कि त्योहार के इस सीज़न में विमान कंपनियों ने किराया सात गुना तक बढ़ा दिया है। गुजारिश की कि न्यायालय तुरंत फौरन सुनवाई करे। लेकिन न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अगुआई वाली खंडपीठ ने यह कहते हुए याचिका ठुकरा दी कि “हवाई यात्रा मत कीजिए”। तो यही समाधान है। जो सेवाएं पहुंच से बाहर हो जाएं, उनका इस्तेमाल ना करें! यही संदेश केंद्र ने भी दिया है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ‘भारतीय वायुयान नियम-2026’ जारी किए हैं। इसके तहत सरकार ने एयरलाइन टिकट की कीमतों को विनियमित/ नियंत्रित करने से परहेज किया है। किराया निर्धारण को ‘मुख्य रूप से’ बाजार की ताकतों पर छोड़ दिया गया है। नए नियम एक जनवरी 2027 से लागू होंगे। इनके तहत एयरलाइंस अपनी परिचालन लागत और अन्य कारकों के आधार पर किराए तय करना जारी रखेंगी।
गौरतलब है, जुलाई 2025 के जब इन नियमों का शुरुआती मसौदा जारी किया गया था, उनमें किराया तय करने की विस्तृत प्रणाली (जैसे बुकिंग क्लास, सीजन संबंधी मांग, ईंधन के भाव आदि को ध्यान में रखते हुए) प्रस्तावित थी। लेकिन अंतिम नियमों में उन्हें हटा दिया गया। हालांकि सरकार ने कहा है कि “असाधारण परिस्थितियों” में किराये में हस्तक्षेप करने का अपना अधिकार उसने सुरक्षित रखा है, लेकिन ये “असाधारण परिस्थितियां” क्या होंगी, इसे परिभाषित नहीं किया गया है।
यात्रियों के लिए राहत की बात बस इतनी है कि नए नियमों के लागू होने के बाद सभी एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर टिकट का कुल मूल्य, कर, शुल्क, टिकट रद्द करने पर लगने वाला शुल्क और रिफंड की शर्तों का विस्तृत ब्योरा प्रकाशित करना होगा। लेकिन उससे अधिक मांग के समय यात्रियों की कीमत पर मनमाना मुनाफा कमाने की कंपनियों की प्रवृत्ति पर तो कोई रोक नहीं लगेगी।
बाजार के तर्क से कीमतें तय होने का औचित्य तब होता है, जब बाजार में प्रतिस्पर्धा को सुनिश्चित किया गया हो। एक या दो कंपनियों के एकाधिकार की स्थिति में यह तर्क उत्पीड़क हो जाता है। अफसोसनाक है कि इससे पीड़ित लोगों को सेवा का इस्तेमाल ना करने जैसी असंवेदनशील सलाह दी जाने लगी है! कल को सुप्रीम कोर्ट यह भी कह सकता है कि दवाएं महंगी हो गई हैं तो इलाज मत कराइए, अनाज महंगा हो गया है तो खाना मत खाइए। पटाखों पर प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट कह ही चुका है कि हमारे आदेश लागू नहीं हो पाते हैं और मजाक बन जाते हैं, इसलिए हम पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं देंगे। सुप्रीम कोर्ट का ऐसा असहाय और निष्ठुर रवैया पहले कभी नहीं रहा। उसके इसी रवैये के चलते लोगों का उसके प्रति भरोसा और सम्मान लगातार कम होता जा रहा है।
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