अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर क्या वायसराय है?
राजदूत बन कर आने के बाद सर्जियो गोर विवादित और संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में भी गए हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश का भी दौरा किया है। पिछले दिनों वे पंजाब के अमृतसर पहुंचे थे। वहां बड़ी संख्या सिख संगत के लोगों ने उनका स्वागत किया। उनके स्वागत के दौरान भारत विरोधी नारे लगे।
द न्यूज लांचर डेस्क
इस साल की शुरुआत यानी जनवरी महीने में जब सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के राजदूत बन कर आए थे तो उन्हें लेकर देश के सत्ता प्रतिष्ठान में बड़े उत्साह का माहौल था। आते ही उन्होंने अपनी खूब चर्चा कराई थी। सरकार के प्रचारतंत्र में तब्दील हो चुके मुख्यधारा के मीडिया ने भी 'बावरे गांव में ऊंट आया’ की तर्ज पर गोर को सिर-आंखों पर बैठाया था।
गोर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी हैं और उन्होंने ट्रंप के चुनाव अभियान में बहुत सक्रिय हिस्सेदारी की थी। ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी नई टीम बनाने में भी गोर ने बड़ी भूमिका निभाई थी। इसलिए माना गया था कि गोर को भारत का राजदूत नियुक्त करने से दोनों देशों के संबंधों में और ज्यादा गरमाहट आएगी। लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उलटा।
जब से गोर भारत आए है तब से भले ही उनके कारण से नहीं हो लेकिन भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव आया है। राष्ट्रपति ट्रंप लगातार भारत को निशाना बना रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपमानित करने वाले बयान भी उन्होंने दिए हैं। अपने देश में भारतवंशियों को परेशान करने में भी वे कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
इस बीच गोर को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कई नेता और विपक्ष के इकोसिस्टम के इन्फ्लूएंसर गोर को 'वायसराय गोर’ कहने लगे हैं। 'वायसराय गोर’ कह कर उनके बारे में बहुत कुछ लिखा जा रहा है। गोर खुद भी वायसराय जैसा बर्ताव कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत पर ब्रिटिश हुकूमत के समय वायसराय ही देश पर राज करते थे। वे राजा की तरह पूरे देश में घूमते थे। गोर भी उसी तरह देश भर में घूम रहे हैं।
राजदूत बन कर आने के बाद सर्जियो गोर विवादित और संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में भी गए हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश का भी दौरा किया है। पिछले दिनों वे पंजाब के अमृतसर पहुंचे थे। वहां बड़ी संख्या सिख संगत के लोगों ने उनका स्वागत किया। उनके स्वागत के दौरान भारत विरोधी नारे लगे। 'खालिस्तान जिदाबाद’ का नारा भी लगाया गया। इसके साथ-साथ 'गॉड ब्लेस अमेरिका’ का भी नारा लगा। गोर के साथ 28 सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी था।
अमेरिकी राजदूत की भारत में इस तरह गतिविधियां बेहद आपत्तिजनक हैं लेकिन पता नहीं क्यों भारत सरकार इस बारे में खामोश है। अभी तक सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर विरोध नहीं दर्ज कराया गया है।
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