Sunday, November 1, 2026
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भाजपा जुटा लेगी दो तिहाई बहुमत

भाजपा जुटा लेगी दो तिहाई बहुमत

भाजपा का हिसाब किताब इस बात से मजबूत होता दिख रहा है कि तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी दोनों में टूट हो गई है। तभी ममता बनर्जी को साथ लेकर जिस ‘इंडिया’ ब्लॉक की ताकत पहले 233 सीट की थी वह घट कर 178 सीट की रह गई है। विपक्षी गठबंधन की ओर से ही यह आंकड़ा दिया गया है कि 19 पार्टियों के 178 लोकसभा सांसद और 62 राज्यसभा सांसद चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं।

द न्यूज लांचर डेस्क


महिला आरक्षण कानून यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन बिल पास कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी दो तिहाई बहुमत की तलाश में लगी है। इस साल अप्रैल में हुए संसद के विशेष सत्र में सरकार के तीन बिल पास नहीं होने के बाद से ही इसकी कोशिश हो रही है। संसद के मानसून सत्र का अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है तो उसके पीछे भी यही कारण बताया जा रहा है।

सवाल है कि क्या भाजपा अगले कुछ दिन में दो तिहाई बहुमत जुटा लेगी ताकि वह संविधान संशोधन के विधेयक पास करा सके? यह सवाल इसलिए है क्योंकि चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार चल रहे प्रदर्शन और देश बन रहे माहौल के कारण भाजपा के लिए नई पार्टियों का समर्थन हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है।

पहले जो काम आसान दिख रहा था उसमें भी नई पेचीदगियां पैदा हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस व दूसरी विपक्षी पार्टियों का गठबंधन है तो दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी है, जिसको आम आदमी पार्टी का समर्थन मिल रहा है। इनके लगातार प्रदर्शनों से सरकार विरोधी माहौल बन रहा है।

भाजपा के एक जानकार नेता के मुताबिक इन पार्टियों के विरोध प्रदर्शनों के बीच भी दो तिहाई बहुमत जुटाना संभव हो जाएगा क्योंकि कांग्रेस से नाराज पार्टियां प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सरकार का साथ देने को तैयार हैं। इसमें भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके से है।

गौरतलब है कि डीएमके ने मंगलवार, छह अक्टूबर को हुए प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया। बीजू जनता दल का भी कांग्रेस से विरोध है लेकिन उसके नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। डीएमके ने कांग्रेस से दूरी बढ़ाई है तो भाजपा को लग रहा है कि डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन उसको मिल जाएगा।

अगर ये 22 सांसद सीधे तौर पर सरकार के विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे तो सदन से गैरहाजिर रह कर भी सरकार की मदद कर सकते हैं। वैसे भी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के ‘इंडिया’ ब्लॉक में शामिल होने के बाद डीएमके के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं।

इस बीच भाजपा का हिसाब किताब इस बात से मजबूत होता दिख रहा है कि तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी दोनों में टूट हो गई है। तभी ममता बनर्जी को साथ लेकर जिस ‘इंडिया’ ब्लॉक की ताकत पहले 233 सीट की थी वह घट कर 178 सीट की रह गई है। विपक्षी गठबंधन की ओर से ही यह आंकड़ा दिया गया है कि 19 पार्टियों के 178 लोकसभा सांसद और 62 राज्यसभा सांसद चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं।

इसका अर्थ है कि ‘इंडिया’ ब्लॉक की ताकत में 47 सांसदों की कमी आई है। अगर यह संख्या भाजपा के साथ जुड़ जाती है तो संसद में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा करने में उसे समस्या नहीं आएगी। कुछ अन्य सांसदों को गैरहाजिर करा कर भाजपा यह काम कर सकती है।

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